मोबाइल के दौर में भी जिंदा है ये कबीलाई रेडियो, जिसकी आवाज से कांपते हैं शिकारी!

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Telangana News : आदिलाबाद के जंगलों में गोंड और कोलम जनजातियों का पेप्रे संचार और सुरक्षा का पारंपरिक वाद्य यंत्र है, आधुनिकता और संसाधनों की कमी से लुप्ति की कगार पर. पेप्रे का इस्तेमाल कई तरह से किया जाता रहा है. कबीले के बुजुर्ग बताते हैं कि घने जंगलों में शिकार के दौरान या लकड़ी बीनते समय, हिंसक जानवरों को अपनी मौजूदगी का अहसास कराने और उन्हें दूर रखने के लिए पेप्रे बजाया जाता था.   Read More ...

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