Madhubani News: मिथिलांचल में क्यों खास है चूरा-दही? साधु-संतों से जुड़ी है कहानी

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भारत में जब भी मिथिलांचल की बात होती है, तो चूड़ा-दही का जिक्र जरूर होता है. पहले यह भोजन मुख्य रूप से पंडितों और साधु-संतों तक सीमित था, क्योंकि वे शुद्धता के कारण किसी के घर का पका हुआ भोजन या नमक नहीं खाते थे. इसी वजह से मिथिलांचल में चूड़ा-दही खाने की परंपरा शुरू हुई. समय के साथ यह परंपरा आम लोगों में भी लोकप्रिय हो गई और आज यहां लोग इसे सुबह से लेकर रात तक कभी भी खाते हैं.   Read More ...

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