रोज 1-2 मिनट की ये जांच बचा सकती है लाखों का नुकसान! पशु के हाव-भाव से समझें उसकी सेहत का हाल
Dairy Animal Care Tips: मई से अक्टूबर के महीनों में पशुओं में संक्रामक बीमारियों और बाह्य परजीवियों (जैसे किलनी, मक्खी, मच्छर) का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जो पशुओं का खून चूसकर उनका वजन और दूध उत्पादन घटा देते हैं व एक से दूसरे पशु में संक्रमण फैलाते हैं. पशु वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह के अनुसार, इस दौरान गलगोटू, लंगड़ी और खुरपका-मुंहपका (FMD) जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराना और पशुबाड़े की साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है. बाड़े को परजीवियों से मुक्त रखने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर दवा की दो बूंद एक लीटर पानी में मिलाकर पोछा लगाना चाहिए. इसके साथ ही, पशुपालकों को रोजाना पशु के चारे खाने की मात्रा और उसके हाव-भाव को 1-2 मिनट बारीकी से निगरानी करनी चाहिए, क्योंकि चारा कम खाना बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकता है. समय पर इन लक्षणों को पहचान कर इलाज कराने से पशुओं की जान बचाई जा सकती है और लाखों रुपये के नुकसान के साथ-साथ पशुपालन की लागत को भी कम किया जा सकता है. Read More ...
Related posts
समंदर से सुकून तक… जंग के बीच 3,300 से ज्यादा अपनों को सुरक्षित बचा लाया भारत
भारत का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्लान! आपकी जेब पर सीधे पड़ने वाला है इसका असर
नाम विदेशी, लेकिन बिहार में सुपरहिट! इन आम किस्मों की मचती है लूट, ये है कारण
LPG सिलेंडर लेने को नहीं.. तो ग्राहकों की ये सारी भीड़ असल में जा कहां रही
Don't miss
Newsletter
Receive daily updates !
Sport Trending
-
Kolkata Knight Riders में Manish Pandey की वापसी और IPL 2026 की चुनौतियाँ
21-05-26 07:05:04pm
Last Comments
A writer is someone for whom writing is more difficult than it is for other people.
Riding the main trail was easy, a little bumpy because my mountain bike is a hardtail