मधुबनी में आज भी तामा से नापा जाता है चावल, 1 सेर में 5 लोगों का पेट भरता, लक्ष्मी रूप में होती पूजा

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आज हम किसी भी चीज को तौलने के लिए तराजू का इस्तेमाल करते है और 1 किलो को 1000 ग्राम मानते है. लेकिन मिथिलांचल में पहले चावल, दाल, आटा जैसी चीजें तराजू से नहीं, बल्कि तामा से मापी जाती थी. बिहार के अलग-अलग हिस्सों में इसे तामा, सेराही या पेला (पायला) कहा जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसका उपयोग होता है. अगर 4 या 5 लोगों को खाना खिलाना हो तो एक सेर चावल तामा (सेराही) से नापकर पकाया जाता है और इतने चावल में 5 लोग आराम से भोजन कर लेते है.   Read More ...

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