जालोर की बावड़ी का नाम क्यों पड़ा ‘सांड बावड़ी’? पीछे छिपी है राजा वीरमदेव से जुड़ी कहानी

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जालोर की ऐतिहासिक सांड बावड़ी अपने अनोखे इतिहास और राजा वीरमदेव से जुड़ी कहानी के लिए खास मानी जाती है. इतिहासकार बंसीलाल सोनी के अनुसार, कभी इस बावड़ी को ‘स्वर्ण बावड़ी’ कहा जाता था. मान्यता है कि जैसलमेर से वीरमदेव की जान को खतरे का संदेश सांड पर सवार होकर जालोर भेजा गया था. संदेशवाहक सांड पर सवार होकर तेजी से जालोर पहुंचा, लेकिन यहां पहुंचते ही इसी स्थान पर सांड की मृत्यु हो गई. इसके बाद इस जगह का संबंध सांड बावड़ी से जोड़ा गया. स्थानीय मान्यताओं में बावड़ी के पानी को चमत्कारी और कभी न सूखने वाला भी बताया जाता है.   Read More ...

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