जब पूरी के भगवान जगन्नाथ को बलिया में देना पड़ा दर्शन, संत सुदिष्ट को गुरु कृपा से मिली दिव्यदृष्टि, समाधि से जुड़ी है लाखों की आस्था, जाने

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बलिया के सिद्ध संत सुदिष्ट बाबा गुसाईं का जन्म 1785 में गोन्हिया छपरा में हुआ, गुरु कृपा से दिव्य दृष्टि मिली, 1905 में देह त्याग, उनकी समाधि और सुदिष्ट महाविद्यालय आज भी आस्था केंद्र हैं. प्रख्यात इतिहासकार डॉ शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि, सुदिष्ट बाबा महाराज बाबा (गुसाईं) के ग्यारह प्रमुख शिष्यों में सबसे छोटे थे. गुरु के सान्निध्य में रहकर सेवा, साधना और सत्संग करते-करते उनकी दृष्टि इतनी निर्मल हो गई थी कि, बाबा सुदिष्ट अर्थात् सुदृष्टि रूप में विख्यात हो गए.   Read More ...

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