न GPS, न डिजिटल टैग... पहले का देसी जुगाड़! घंटियों की मधुर धुन बता देती थी किसका है पशु, जानिए अनोखी परंपरा
Animal Bells: आधुनिक दौर में जहां पशुओं की पहचान के लिए डिजिटल टैग, जीपीएस ट्रैकर और माइक्रोचिप जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है, वहीं एक समय ऐसा भी था जब घंटियों की मधुर आवाज ही पशुओं और उनके मालिक की पहचान बनती थी. राजस्थान सहित देश के कई ग्रामीण इलाकों में गाय, बैल, ऊंट और भेड़ों के गले में अलग-अलग आकार और ध्वनि वाली घंटियां बांधी जाती थीं. इनकी अनोखी आवाज सुनकर चरवाहे और ग्रामीण कई किलोमीटर दूर से ही पहचान लेते थे कि कौन-सा पशु किस दिशा में है और उसका मालिक कौन है. यह परंपरा केवल सुविधा का माध्यम नहीं थी, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, पशुपालन और लोक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी थी. Read More ...
Related posts
Don't miss
Newsletter
Receive daily updates !
Sport Trending
-
अश्विन की खौफनाक भविष्यवाणी, बोले- जल्द खत्म हो जाएगा क्रिकेट का यह फॉर्मेट
02-07-26 07:07:39pm
Last Comments
A writer is someone for whom writing is more difficult than it is for other people.
Riding the main trail was easy, a little bumpy because my mountain bike is a hardtail