एक आइसक्रीम के दाम में मिलता था 1000 ईंट, 130 साल पहले कितना सस्ता था सुल्तानपुर, गजेटियर में मिले प्रमाण

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एच आर नेविल्स ने "सुल्तानपुर गजेटियर" में लिखा है कि 1890 के दशक में उस समय जिले के अधिकांश लोगों के मकान कच्चे हुआ करते थे. गांवों में मिट्टी से बने घर ही होते थे और पक्के मकान बहुत कम दिखाई देते थे. पक्की ईंटें जरूर बनाई जाती थीं, लेकिन उनका उपयोग केवल ताल्लुकेदारों, बड़े जमींदारों और उन परिवार के लोगों द्वारा किया जाता था जो आर्थिक रूप से काफी संपन्न होते थे साधारण किसान और मजदूर अपनी क्षमता के हिसाब से मिट्टी कपड़ा और बांस का बनाया हुआ घर तैयार करते थे उसे समय मकान में पत्थर का इस्तेमाल भी लगभग ना के ही बराबर हुआ करता था.   Read More ...

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