सरगुजा में आज भी जिंदा है मेझरी की पारंपरिक खेती, कम लागत में तैयार होती है फसल

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कृषक गणेश कुमार यादव ने बताया कि मेझरी उनके क्षेत्र की पारंपरिक फसल है. इसकी खेती जुलाई महीने के आसपास शुरू की जाती है. खेत की जुताई के बाद इसके बीज बो दिए जाते हैं, इसमें धान की तरह अलग से रोपाई की आवश्यकता नहीं होती। इस कारण किसान कम मेहनत और कम लागत में इसकी खेती कर पाते हैं.   Read More ...

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