देवी तोरी सांवली बा सुरतिया...से शुरू होती थी कजरी, पूर्वांचल की सदियों पुरानी है स्मृति, अकबर के दौर से जुड़ा है इसका इतिहास

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जौनपुर में कजरी लोकगीत का इतिहास मुगल बादशाह अकबर के दौर से जुड़ा है. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज मिश्रा इस प्राचीन लोक परंपरा को सहेजने का प्रयास कर रहे हैं. कजरी का संसार केवल एक गांव या एक जिले तक सीमित नहीं रहा। पूर्वांचल से लेकर हिंदी भाषी क्षेत्रों तक इसकी अलग-अलग शैलियां विकसित हुईं. मिर्जापुर, विंध्याचल और बनारस की कजरी ने अपनी खास मिठास और गायकी के कारण अलग पहचान बनाई. डॉ. मिश्रा बताते हैं कि कजरी में जीवन के अनेक रंग दिखाई देते हैं.   Read More ...

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