अंबाला छावनी की कुम्हार मंडी में महंगाई और उचित दाम न मिलने से पुश्तैनी कला संकट में, नई पीढ़ी काम से हो रही दूर

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Ambala News: आधुनिकता के इस दौर में रंग-बिरंगी लाइटों और बिजली की झालरों ने भले ही बाजारों में अपनी जगह बना ली हो, लेकिन मिट्टी के दीयों की लौ आज भी भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान है. हालांकि, इन दीयों को अपने हाथों से आकार देने वाले कुम्हारों की जिंदगी में अब चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं. अंबाला छावनी की कुम्हार मंडी में महंगाई और उचित दाम न मिलने से पुश्तैनी कला संकट में है. कुम्हारों का कहना है कि लागत बढ़ने और मुनाफा न होने से नई पीढ़ी इस काम से दूर हो रही है.   Read More ...

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