आराम छोड़ दंतेवाड़ा के आद‍िवास‍ियों की बदल दी ज‍िंदगी, सुनें पद्मश्री दंपत्‍त‍ि की कहानी

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दंतेवाड़ा के जंगल और आद‍िवासी इलाकों में सेवा कर रहे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्‍नी सुनीता गोडबोले को भारत सरकार ने इस बार पद्मश्री 2026 से सम्‍मान‍ित क‍िया है. दंतेवाड़ा के ऐसे इलाके जहां दूर-दूर तक सन्‍नाटा फैला है और आवाजों को सुनने वाला कोई नहीं है, वहां आद‍िवासि‍यों की पीड़ा, बच्‍चों की क‍िलकार‍ियों को सुनने के ल‍िए महाराष्‍ट्र से एक दंपत्‍त‍ि पहुंचा, ज‍िनका नाम है डॉ. रामचंद्र और सुनीता. लंबे, न‍िर्जनी रास्‍तों पर चलकर ये दंपत्‍त‍ि दंतेवाड़ा के जनजात‍ि समुदाय को स्‍वास्‍थ्‍य सुव‍िधाएं देने लगा. इन्‍होंने न केवल आद‍िवास‍ियों मेड‍िकल सुव‍िधाएं दीं बल्‍क‍ि आद‍िवासी समाज को नशा मुक्‍त करने का भी अभ‍ियान चलाया और स्‍कूलों, गांव, घरों-मोहल्‍लों में जाकर लोगों को जागरुक क‍िया. कुपोषण को सुपोषण में बदला. सुनीता कहती हैं क‍ि मानवता ही मुख्‍य धर्म है, अगर आपको सेवा करनी है तो आपको मानवता रखनी ही होगी और इसके साथ में प्रेम भी होना जरूरी है. आइए जानते हैं दोनों की वर्षों की मेहनत से हुए बदलाव की पूरी कहानी.. वीडि‍यों में सुनते हैं व‍िस्‍तार से...   Read More ...

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