40 साल से शेर अली गाजीपुर की कचहरी में लगा रहे बेल की दुकान, बोले 3 रूपये गिलास से किया शुरू, आज भी लगती है लोगों की भीड़

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शेर अली लोकल 18 से बताते हैं कि आज भी वे उसी परंपरा को निभा रहे हैं. वे देशी और कागजी दोनों तरह के बेलों का उपयोग करते हैं. उनका मानना है कि अकेले कागजी बेल देखने में खूबसूरत भले ही लगे, लेकिन वह देशी बेल जैसा असर नहीं दिखाता. इसलिए, वे दोनों को मिलाकर शरबत तैयार करते हैं, जो पेट के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है. उनका लक्ष्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि लोगों को सस्ता और शुद्ध शरबत पिलाना है.   Read More ...

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