बलिया का भृगु-दर्दर क्षेत्र आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र, कार्तिक पूर्णिमा तक यहां स्नान और कल्पवास से सभी पाप होते हैं दूर, जानें

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बलिया का भृगु-दर्दर क्षेत्र आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि कार्तिक मास में यहां सभी तीर्थ और देवता निवास करते हैं, जिससे इस क्षेत्र का महत्व काशी से भी अधिक माना गया है. पद्म पुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक जब सूर्य तुला राशि में प्रवेश करते हैं. तब सभी ऋषि मुनि, सिद्ध, गंधर्व, यति, योगी और स्वयं सभी तीर्थ इस क्षेत्र में आकर कल्पवास करते हैं. मान्यता यह है कि इस अवधि में यहां आने वाले सभी तीर्थों को भी अपने अंदर पाप मोचन शक्ति की प्राप्ति होती है और इसी वजह से इस तीर्थ का महत्व काशी से भी अधिक माना गया है. इस धार्मिक स्थल से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार इसी दर्दर क्षेत्र में भगवान शिव को शांति और महर्षि भृगु को अपने संताप से मुक्ति मिली थी.   Read More ...

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