पिता मामूली किसान, बेटे के लिए चप्पल खरीदने के नहीं थे पैसे, आज डॉक्टर बन बेटा बना गरीबों का मसीहा

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अक्सर कहा जाता है कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती और पूर्णिया के युवा चिकित्सक डॉ. तारकेश्वर कुमार इसकी मिसाल हैं. कटिहार जिले के मनिहारी के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे तारकेश्वर ने अभावों में बचपन बिताया. एक समय ऐसा था जब उनके पास पहनने के लिए चप्पल तक नहीं थी, मां ने टाट से चप्पल सिलकर दी. पिता खेतों में मेहनत करते थे ताकि बेटा पढ़ सके. समाज के तानों और गरीबी के बावजूद उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया. आज वे मात्र 100 रुपये फीस लेकर इलाज करने वाले डॉक्टर के रूप में गरीबों के लिए ‘उम्मीद की किरण’ बन चुके हैं.   Read More ...

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