हैदराबाद की पुरानी सरायों में आज भी जिंदा है निज़ामी दौर की मेहमाननवाज़ी, गरीब मुसाफिरों का बनती सहारा
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के चारमीनार और नामपल्ली इलाके की तंग गलियों के बीच आज भी कई ऐतिहासिक सरायें और मुसाफिरखाने खड़े हैं, जिनका इतिहास निज़ाम काल से जुड़ा हुआ है. ये इमारतें उन लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं, जो महंगे होटलों का खर्च नहीं उठा सकते. नामपल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित ‘नामपल्ली सराय’ इंडो-सारासेनिक वास्तुकला का शानदार उदाहरण है, जिसका निर्माण करीब 1910 में छठे निज़ाम मीर महबूब अली पाशा की याद में कराया गया था. कभी शाही मेहमानों के ठहरने के लिए बनी यह सराय आज गरीब मुसाफिरों, मरीजों और मजदूरों का ठिकाना बन चुकी है. उस्मानिया और नीलोफर जैसे बड़े अस्पतालों के पास होने के कारण इलाज के लिए आए कई परिवार यहां सस्ती और सुरक्षित जगह पा लेते हैं. हालांकि समय के साथ इन ऐतिहासिक इमारतों की हालत जर्जर होती जा रही है, जिससे इनके संरक्षण की चुनौती भी बढ़ती जा रही है. Read More ...
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13-03-26 06:03:57pm
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Riding the main trail was easy, a little bumpy because my mountain bike is a hardtail