बुद्धदेव की राह पर चला होता बंगाल तो ममता के 15 साल का राज नहीं बनता हकीकत, BJP का उभार भी होता मुश्किल!
बुद्धदेव भट्टाचार्य ने पार्टी लाइन से अलग स्टैंड अपना कर सत्ता भले गंवा दी, लेकिन उनकी यह राजनीतिक शहादत ही बंगाल के विकास के लिए सीएम शुभेंदु अधिकारी के प्रयासों का आधार बनती दिख रही है. जिस बंगाल से बुद्देव के बुलावे पर आए टाटा समूह को बेआबरू कर लोगों ने गुजरात जाने पर विवश किया, अब उसी बंगाल में टाटा की वापसी के प्रयास हो रहे हैं. ‘पूंजी का कोई रंग नहीं होता’- बुद्धदेव का क्रांतिकारी सोच था. मदरसों पर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगा कर भाजपा आज बंगाल की सत्ता में है, लेकिन इसी तरह का बयान देने पर बुद्धदेव अपनी ही पार्टी में आलोचना का पात्र बन गए थे. अगर बुद्धदेव के तब के विचारों पर बंगाल ने भरोसा किया होता तो न ममता बनर्जी को सरकार चलाने का मौका मिलता और न भाजपा ही बंगाल में सरकार बना पाती Read More ...
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