अटल जी का स्नेह और मोदी की श्रद्धा: एक फोन से शुरू हुआ रिश्ता, जिसने इतिहास लिख दिया

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अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी का रिश्ता महज शीर्ष नेता और संगठनकर्ता का नहीं, बल्कि पारखी नजर और तपते कुंदन की पहचान का था. यह दास्तान सिर्फ अक्टूबर 2001 की उस एक फोन कॉल तक सीमित नहीं है, जिसने मोदी को दिल्ली के दफ्तर से गांधीनगर की सत्ता के केंद्र में ला खड़ा किया; यह कहानी है एक संरक्षक के उस अटूट यकीन की, जिसने प्रशासनिक अनुभव से कोरे एक प्रचारक में देश का भविष्य देख लिया था.   Read More ...

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