बागेश्वर के पहाड़ों में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, मेहमाननवाजी और संस्कृति का अहम हिस्सा, जानें कैसे बनीं ये परंपरा

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बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों में बड़ी संख्या में लोग खेती-बाड़ी, पशुपालन और दूसरे मेहनत भरे कामों से जुड़े हैं. सुबह जल्दी उठकर खेतों में जाना, पशुओं के लिए चारा जुटाना और पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना यहां की दिनचर्या का हिस्सा है. ऐसे में गर्म चाय पीने से लोगों को ताजगी और गर्माहट का एहसास होता है. चाय में मौजूद कैफीन कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ा सकता है.   Read More ...

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