भीलवाड़ा में ‘काले सोने’ की दस्तक! पूजा-अर्चना संग शुरू अफीम चिराई, खेतों में आस्था और मेहनत का अनोखा संगम

Image credit: Internet

Bhilwara News : राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में इन दिनों खेतों में एक अलग ही हलचल और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है. ‘काला सोना’ कही जाने वाली अफीम की फसल अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है, जहां खेती सिर्फ उत्पादन नहीं बल्कि परंपरा, विश्वास और धार्मिक आस्था का प्रतीक बन जाती है. डोडों के पकने के साथ ही किसानों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू कर दी है और नाणा माता जी की स्थापना कर शुभ मुहूर्त में चिराई की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है. सूर्योदय से पहले नंगे पांव खेतों में पहुंचकर किसान अफीम का दूध एकत्र करते हैं, जो वर्षों पुरानी परंपराओं और अनुशासन का हिस्सा है. परिवार के साथ मिलकर की जाने वाली यह मेहनत सिर्फ फसल की सुरक्षा नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम भी है. भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ की कई तहसीलों में यह दृश्य ग्रामीण जीवन, आस्था और कृषि का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है.   Read More ...

free visitor counters