गैस चूल्हों के दौर में भी नहीं बदली गांवों की पहचान, आज भी देसी तरीके से तैयार होता है स्वाद का खजाना
Bharatpur Hindi News: आधुनिकता के इस दौर में जहां रसोईघरों में गैस चूल्हे और आधुनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है, वहीं भरतपुर के कई गांवों में आज भी पारंपरिक जीवनशैली और देसी रसोई संस्कृति जीवित है. यहां मिट्टी और गोबर से बने ‘भेगड़ा’ पर धीमी आंच में दूध गर्म करने और दलिया पकाने की परंपरा आज भी बरकरार है. ग्रामीणों का मानना है कि इस पारंपरिक तरीके से बने भोजन का स्वाद और पौष्टिकता दोनों अधिक होती हैं. भेगड़ा की धीमी आंच पर पकाया गया दूध और दलिया न केवल स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति और विरासत का भी प्रतीक है. Read More ...
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