गायों की रक्षा में दे दी जान! सिर कटने के बाद भी लड़ते रहे झुंझार जी, आज भी होती है पूजा
राजस्थान के शेखावाटी अंचल में लोकदेवता झुंझार जी की कहानी आज भी लोगों की आस्था और वीरता का प्रतीक मानी जाती है. सीकर जिले के स्लोदड़ा गांव में स्थित उनका मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र है, जहां हर साल रामनवमी पर विशाल मेले का आयोजन होता है. लोक मान्यताओं के अनुसार झुंझार जी ने अपने निजी सुख और नई शादी की खुशियों से ऊपर गौ रक्षा को महत्व दिया और गायों को बचाने के लिए अपने भाइयों के साथ लुटेरों का सामना किया.कहा जाता है कि विवाह के तुरंत बाद उन्हें सूचना मिली कि हमलावर गांव की गायों को लूटकर ले जा रहे हैं. इसके बाद वे बिना देर किए अपने भाइयों के साथ युद्ध के मैदान में पहुंच गए. संघर्ष इतना भीषण था कि उनके दोनों भाई वीरगति को प्राप्त हो गए. लोककथाओं में वर्णित है कि झुंझार जी की गर्दन कट जाने के बाद भी उन्होंने दुश्मनों का सामना करना नहीं छोड़ा और अंत तक लड़ते रहे.उनके अद्भुत बलिदान और साहस की स्मृति में ग्रामीणों ने स्लोदड़ा गांव में मंदिर का निर्माण कराया. यहां झुंझार जी, उनके भाइयों और उनकी पत्नी की प्रतीकात्मक प्रतिमाएं स्थापित हैं. आज भी आसपास के गांवों में उन्हें लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है और लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं. आखिर कौन थे झुंझार जी और क्यों सदियों बाद भी उनकी वीरता की गाथा लोगों की जुबान पर है, जानिए इस विशेष रिपोर्ट में. Read More ...
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03-06-26 12:06:26am
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Riding the main trail was easy, a little bumpy because my mountain bike is a hardtail